नई दिल्ली: देश में कोरोना महामारी के संकट के बीच मोरेटोरियम अवधि के दौरान टाली गई EMI पर ब्याज न लेने की मांग पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को कहा कि सरकार आरबीआई के पीछे नहीं छुप सकती. इसे बैंकों की मर्जी पर नहीं छोड़ा जा सकता. सरकार को अपना स्टैंड क्लियर करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से एक हफ्ते में हलफनामा दायर करने को कहा. कोर्ट ने कहा कि सरकार लोगों की तकलीफ को किनारे सिर्फ व्यापारिक नजरिये से नहीं सोच सकती. कोर्ट ने सरकार से कहा कि जल्द फैसला लेकर जवाब दाखिल करे.मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि केंद्र सरकार की तरफ से सुनवाई को बार बार टालने की मांग की जा रही है. अभी तक कोई भी हलफनामा नहीं दाखिल किया गया है. RBI की ओर से भी कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया है.

जस्टिस अशोक भूषण ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आपको अपना पक्ष एकदम साफ रखना चाहिए. जस्टिस भूषण ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन किया था. जस्टिस भूषण ने कहा कि सरकार को हमें आपदा प्रबंधन अधिनियम पर अपना रुख बताना होगा और यह भी बताना होगा कि क्या ब्याज पर ब्याज का हिसाब किया जाएगा. बेंच के दूसरे जज जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि  यह केवल व्यवसाय के बारे में सोचने का समय नहीं है.

गौरतलब बात यह है कि रिजर्व बैंक ने लॉकडाउन के कारण रोजगार छिन जाने की वजह से लोन वालों को राहत देने के मकसद से EMI वसूलने में नरमी दिखाई जाए. रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा है कि वो अपने ग्राहकों को 31 अगस्त तक EMI नहीं भरने का ऑफर दें. हालांकि, इस दौरान ग्राहकों से सामान्य दर से ब्याज वसूलने की भी अनुमति बैंकों को दी गई है.

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